Homeराज्यछत्तीसगढ़बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज) पर 270 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का विशेष प्रशिक्षण आयोजित

बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज) पर 270 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का विशेष प्रशिक्षण आयोजित

 

बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज) पर 270 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का विशेष प्रशिक्षण आयोजित

बेमेतरा, 07 अगस्त 2026

जिला स्वास्थ्य विभाग, बेमेतरा द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से समस्त महिला एवं पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), पर्यवेक्षकों, लेडी हेल्थ विजिटर्स (LHV) एवं RBSK टीम के लिए टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) विषय पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं से 270 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं / प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती लता बंजारे, डॉ. दीपक निराला (शिशु रोग विशेषज्ञ), जिला सलाहकार गैर संचारी रोग (NCD) डॉ. मिथिलेश चंद्राकर तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता को सुदृढ़ करना था, ताकि वे बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान, उचित परामर्श, शीघ्र रेफरल तथा प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर सकें।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु :

1. लक्षणों की पहचान पर जोर : बाल मधुमेह के प्रमुख लक्षण – अत्यधिक प्यास लगना, अधिक भूख लगना, बार-बार पेशाब आना या बिस्तर गीला करना, तेजी से वजन घटना, अत्यधिक कमजोरी और थकान। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल रक्त शर्करा की जांच कराने के निर्देश।

2. आपात स्थिति DKA की पहचान : डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) की शीघ्र पहचान – तेज या गहरी सांस चलना, उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, निर्जलीकरण, सांस से फल जैसी गंध आना अथवा बेहोशी। ऐसे में बच्चे को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार प्रारंभ करना आवश्यक। बार-बार संक्रमण होने वाले बच्चों में मधुमेह की जांच अनिवार्य।

3. भ्रांतियों का निवारण : समाज में प्रचलित भ्रांतियां जैसे – “बच्चों को मधुमेह नहीं हो सकता” या “झाड़-फूंक से ठीक हो सकता है” का खंडन। स्पष्ट किया गया कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए प्रभावित बच्चों को नियमित एवं जीवनभर इंसुलिन उपचार की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान, नियमित इंसुलिन, संतुलित आहार, रक्त शर्करा की निगरानी और निरंतर फॉलो-अप के माध्यम से टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चे स्वस्थ, सक्रिय एवं सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

कार्यक्रम के आयोजन में  यूनिसेफ की ओर से डॉ. गजेंद्र सिंह, स्वास्थ्य विशेषज्ञ के नेतृत्व में महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने सभी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं ANM से अपील की कि वे अपने कार्यक्षेत्र में बाल मधुमेह के प्रति समुदाय, अभिभावकों एवं परिवारों को जागरूक करें एवं संभावित मामलों की शीघ्र पहचान, जांच एवं रेफरल सुनिश्चित करें।

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