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NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा, रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत- उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा…..

रायपुर: राजस्व एवं  उच्च शिक्षा मंत्री माननीय श्री टंक राम वर्मा ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अद्यतन पाठ्यक्रम पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पुस्तक मानचित्र निर्माण के सिद्धांत: का विमोचन किया। उच्च शिक्षा एवं भूगोल के विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली इस बेहद उपयोगी पुस्तक का लेखन प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल द्वारा किया गया ळें

विमोचन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने दोनों विद्वान लेखकों को उनके इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों को मानचित्र कला (Cartography) जैसी महत्वपूर्ण विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझने में अत्यंत सहायक और उपयोगी सिद्ध होगी।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और मातृभाषा व सरल भाषा में ऐसी उच्च स्तरीय अकादमिक पुस्तकों का आना एक सराहनीय कदम है।

’युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा: पद्मश्री जागेश्वर यादव’

इस अवसर पर उपस्थित प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मश्री से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव  ने भी इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए दोनों लेखकों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लेखकों के भगीरथ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में किए गए ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को एक नई, सकारात्मक और प्रगतिशील दिशा प्रदान करते हैं।

पुस्तक के लेखक डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल ने इस अवसर पर बताया कि इस पुस्तक को विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP) के मापदंडों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भूगोल और मानचित्रण के जटिल व तकनीकी सिद्धांतों को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में आधुनिक मानचित्र निर्माण की तकनीकों, अक्षांश-देशांतर के व्यावहारिक उपयोग और भौगोलिक आंकड़ों के सटीक प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

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